अनुशासन संहिता - हिन्दी
साधना का परिचय
विपश्यना भारत की सबसे प्राचीन ध्यान विधियों में से एक है। “विपश्यना” शब्द का अर्थ है — वस्तुओं को उनके वास्तविक स्वरूप में देखना। यह आत्म-निरीक्षण द्वारा आत्म-शुद्धि की प्रक्रिया है।
प्राकृतिक श्वास का निरीक्षण करते हुए मन को एकाग्र किया जाता है। जागरूकता बढ़ने पर साधक शरीर और मन के परिवर्तनशील स्वभाव का अनुभव करता है तथा अनित्यता, दुःख और अनात्मा के सत्य को प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा जानता है।
विपश्यना क्या नहीं है
- यह अंधविश्वास पर आधारित कोई कर्मकांड नहीं है।
- यह केवल बौद्धिक या दार्शनिक चर्चा नहीं है।
- यह आराम, छुट्टी या मेल-जोल का अवसर नहीं है।
- यह जीवन की समस्याओं से भागने का साधन नहीं है।
विपश्यना क्या है
- यह दुःखों को समाप्त करने की साधना है।
- यह मानसिक शुद्धि की विधि है।
- यह जीवन जीने की कला है।
- यह मन को शांत और संतुलित बनाती है।
ध्यान और आत्म-अनुशासन
आत्म-निरीक्षण द्वारा आत्म-शुद्धि की प्रक्रिया सरल नहीं है। साधकों को गंभीर प्रयास करना होता है। पाठ्यक्रम की सफलता का रहस्य निरंतर अभ्यास और अनुशासन है।
साधकों को सम्पूर्ण पाठ्यक्रम के दौरान केंद्र में रहना आवश्यक है तथा सभी नियमों का पालन करना होगा।
गंभीर मानसिक विकार वाले व्यक्ति
गंभीर मानसिक विकारों से ग्रस्त लोगों के लिए यह पाठ्यक्रम उपयुक्त नहीं हो सकता। विपश्यना चिकित्सा या मनोचिकित्सा का विकल्प नहीं है।
आचार संहिता
विपश्यना साधना की नींव है — शील, समाधि और प्रज्ञा।
पंचशील
- किसी भी प्राणी की हत्या से विरत रहना।
- चोरी न करना।
- किसी भी प्रकार की यौन गतिविधि से दूर रहना।
- असत्य भाषण न करना।
- मादक पदार्थों से दूर रहना।
पुराने साधकों के लिए अतिरिक्त नियम
- दोपहर के बाद भोजन न करना।
- इंद्रिय-भोग और शारीरिक सजावट से दूर रहना।
- ऊँचे या विलासितापूर्ण बिस्तरों का उपयोग न करना।
शिक्षक एवं तकनीक की स्वीकृति
साधकों को शिक्षक के निर्देशों और अनुशासन का पूर्ण पालन करना होगा तथा साधना उसी प्रकार करनी होगी जैसा बताया जाए।
अन्य साधनाएँ और अनुष्ठान
पाठ्यक्रम के दौरान सभी प्रकार की पूजा, प्रार्थना, मंत्र-जाप, उपवास, अन्य ध्यान-पद्धतियाँ और धार्मिक अनुष्ठान बंद रखने होंगे।
शिक्षक से प्रश्नोत्तर
साधक प्रतिदिन निर्धारित समय पर शिक्षक से अपनी शंकाओं का समाधान कर सकते हैं।
आर्य मौन
पाठ्यक्रम आरंभ होने से लेकर अंतिम पूर्ण दिवस तक सभी साधकों को आर्य मौन का पालन करना होगा। इशारों, लिखित संदेशों या संकेतों द्वारा भी संवाद नहीं करना है।
पुरुषों और महिलाओं की अलग व्यवस्था
पुरुषों और महिलाओं के रहने, भोजन करने और ध्यान करने की व्यवस्था अलग-अलग होगी। शिविर के दौरान पति-पत्नी, मित्र या परिवार के सदस्य आपस में संपर्क नहीं करेंगे।
शारीरिक संपर्क
पूरे पाठ्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार का शारीरिक संपर्क वर्जित है।
योग और व्यायाम
पाठ्यक्रम के दौरान योग, दौड़ना और अन्य व्यायाम नहीं किए जाएंगे। विश्राम के समय केवल निर्धारित क्षेत्र में टहलना अनुमत है।
धार्मिक वस्तुएँ
माला, ताबीज, क्रिस्टल या अन्य धार्मिक वस्तुएँ केंद्र में उपयोग नहीं की जाएंगी।
नशीले पदार्थ
शराब, तंबाकू, नशीले पदार्थ, नींद की गोलियाँ और अन्य मादक वस्तुएँ निषिद्ध हैं।
भोजन
साधकों को साधारण शाकाहारी भोजन प्रदान किया जाएगा। उपवास की अनुमति नहीं है।
वस्त्र
वस्त्र सरल, शालीन और आरामदायक होने चाहिए। भड़कीले या शरीर को अधिक प्रदर्शित करने वाले वस्त्र नहीं पहनने चाहिए।
बाहरी संपर्क
पाठ्यक्रम समाप्त होने तक मोबाइल, फोन, पत्र और बाहरी संपर्क बंद रहेंगे। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रबंधन के पास जमा रखने होंगे।
संगीत, पढ़ना और लिखना
संगीत सुनना, पुस्तक पढ़ना और नोट्स लिखना अनुमति नहीं है।
रिकॉर्डिंग उपकरण और कैमरा
शिक्षक की अनुमति के बिना कैमरा या रिकॉर्डिंग उपकरणों का उपयोग नहीं किया जा सकता।
पाठ्यक्रम वित्त व्यवस्था
विपश्यना पाठ्यक्रम केवल दान के आधार पर संचालित होते हैं। शिक्षक और आयोजक किसी प्रकार का शुल्क नहीं लेते।
सारांश
ऐसा कोई कार्य न करें जिससे किसी को बाधा पहुँचे। दूसरों द्वारा उत्पन्न व्यवधानों की उपेक्षा करें।
पूर्ण अनुशासन और गंभीर प्रयास द्वारा ही साधक विपश्यना का वास्तविक लाभ प्राप्त कर सकता है।
पाठ्यक्रम समय-सारिणी
| प्रातः 4 बजे | सुबह की जगाने की घंटी |
| प्रातः 4.30 से 6.30 | हॉल में अथवा अपने निवास पर ध्यान |
| प्रातः 6.30 से 8 | नाश्ता ब्रेक |
| सुबह 8 से 9 | ध्यान कक्ष (हॉल) में सामूहिक साधना |
| सुबह 9 से 11 | आचार्यों की सूचना अनुसार हॉल में अथवा निवास स्थान में ध्यान |
| 11 से 12 दोपहर | लंच ब्रेक |
| 12 दोपहर - 1 | विश्रांति और आचार्यों से प्रश्नोत्तर |
| 1 से 2.30 | हॉल में अथवा निवास स्थान में ध्यान |
| 2.30 से 3.30 | हॉल में सामूहिक साधना |
| 3.30 से 5 | आचार्यों की सूचना अनुसार हॉल में अथवा निवास स्थान में ध्यान |
| 5 से 6 | चाय और विश्राम |
| शाम 6 से 7 | हॉल में सामूहिक साधना |
| शाम 7 से 8.15 | हॉल में आचार्यों के प्रवचन |
| 8.15 से 9 | हॉल में सामूहिक साधना |
| 9 से 9.30 | हॉल में प्रश्नोत्तर का समय |
| रात 9.30 | अपने कमरे में विश्रांति और रोशनी बंद |
आप प्रस्तावित विपश्यना शिविर में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं.